Friday, October 9, 2020

आइये बहनों अपने प्रतीक चिण्ह को समझें :दीपिका डा. प्रवीण गुप्ता

आइये बहनों अपने प्रतीक चिन्ह को समझें:दीपिका डा. प्रवीण गुप्ता

बहिनों आज हम बात करते हैं अपने समाज के प्रतीक चिन्ह के विषय पर—

यह प्रतीक चिन्ह जो हमारे समाज की पहचान के रूप में हमारी धरोहर है

सूर्य का प्रतीक एक गोल घेरा जिसकी परिधि पर किरणें व प्रकाश के प्रतीक रूप में क्रमशः

24 रेखाएं तथा 24 त्रिभुज है।

जो दिन रात 24 घंटे के प्रतीक हैं,

घेरे के अंदर एक स्वास्तिक चिन्ह जिसकी भुजाएं दाहिनी ओर घूमती हुई किनारों पर कुछ गोलाई लेकर मुडती हुई है।

स्वास्तिक के चार कोणों में 4 बिंदु है स्वास्तिक के नीचे की ओर माथुर वैश्य शब्द है वे मानो स्वास्तिक को अपने कंधों पर धारण किए हों ।

माथुर वैश्य शब्द हमें स्वास्तिक के अंदर ही लिखना होता है जैसा की चित्र में दर्शाया गया है।

प्रतीक चिन्ह को किसी भी एक रंग में छपवाया जा सकता है,

यदि

बहुरंगी छपवाना हो तो उस दशा में स्वास्तिक तथा बिंदु लाल रंग में होंगे व गोले की परिधि — परिधि पर किरण सूचक रेखाएं तथा माथुर वैश्य शब्द नीले रंग में रहेंगे ,त्रिभुज पीले रंग में होंगे।

अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा के प्रतीक चिन्ह के रंग रूप ,डिजाइन में कोई भी व्यक्ति परिवर्तन नहीं कर सकेगा।

सभी इकाइयों द्वारा मुद्रित सामग्री पर प्रतीक चिन्ह होगा बगैर प्रतीक चिन्ह मुद्रित सामग्री का वितरण निषेध होगा, ऐसा हमारे विधान में लिखा हुआ है।

और विधान किसी भी समाज की आत्मा होती है।

बहनों मेरा तो अपना मानना तो यह भी है,

कि हम अपने विवाह के कार्ड पर, अपने विजिटिंग कार्ड पर और अन्य सामग्री पर भी मुद्रित कर सकते हैं जिससे हमारे समाज की पहचान बन सके।

लेखिका केन्द्रीय महिला मंडल की महामंत्राणी हैं।

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