Friday, October 9, 2020

मजबूर और गरीबों की आवाज थे रामविलास

श्रीगोपाल गुप्ता

भारतीय राजनीति और दुनिया में अपनी बड़ी पहचान बना चुके बाबा साहेब आंबेडकर और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम के बाद सबसे बड़े दलित नेता केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान आखिरकार संसार को अलविदा कह गए! “न काऊ से दोस्ती और न काऊ से बैर” के सिद्धांत पर जीवन भर पालन करने वाले “अज्ञातशत्रु” पासवान का गत दिवश दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया! उन्होने 74 वर्ष की आयु में दुनिया को आखिरी सलाम कहकर अपनी अनन्त यात्रा में लीन हो गए! पासवान देश की ऐसी राजनीतिक शख्सियत थे जिनकी मिशाल दुनिया के किसी भी राजनीतिक क्षितिज पर मिलना असंभव है! हर दिल अजीज और मिलनसार पासवान के मित्र और शुभचिंतक आज के दूषित हो चुके राजनीतिक वातावरण में भी प्रत्येक दल में हैं, और यही वो कारण है कि उन्होने देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के अगुआ छह प्रधानमंत्री के नेतृत्व मे उनकी कैबिनेट में मंत्री के रुप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्बहन सफलता पूर्वक किया! आजादी से पहले से ही अत्यंत पिछड़े राज्य बिहार के खगड़िया जिले के एक छोटे से गांव शाहरबान्नी गांव में 5 जुलाई 1946 में एक दलित व गरीब किसान जामुन प्रसाद व सियादेवी के यहां पुत्र के रुप में जन्मे रामविलास शुरु से ही कुशाग्र बुद्धि के मेघावी छात्र थे! प्राथमिक शिक्षा दीक्षा के साथ एम ए कोशी काॅलेज खगड़िया से ग्रहण करने के बाद पटना से एल एल बी की डिग्री ली! शुरु से ही उनके मन मे दलितों को गरीबों के साथ होने वाले अन्याय और भेदभाव के विरूद्ध आवाज बुलंद करने का जजबा था, उसका परिणाम यह निकलकर आया कि उन्होने 1969 में उप पुलिस अधीक्षक की मिली नोकरी को छोड़कर राजनीति का मार्ग चुना! उसका फल भी उन्हे इसी साल 1969 में जब मिला तब वे पहली मर्तबा संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी मोर्चा के टिकट पर बिहार विधानसभा में सुरक्षित सीट से चुनकर विधायक बने! मगर उन्होने अपने आदर्श राजनारायण व जयप्रकाश नारायण के आदेश सन् 1974 में लोकदल की सदस्यता ले ली!

मगर इसी साथ 1975 में पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के द्वारा लगाये आपातकाल के कारण उन्हे जेल जाना पड़ा! मगर जब वे जेल से 77 में वाहर आये तो जनता पार्टी के प्रत्याशी के तौर बिहार के हाजीगंज क्षेत्र से बल्ड्र रिकार्ड के साथ सांसद चुनकर संसद पहुंचे, सन् 1989 में 84 की हार का हिसाब चुकता करते हुये पासवान ने हाजीपुर से जीतते हुये अपने ही 77 वाले रिकार्ड का ध्वस्त करते हुये और बड़े मार्जिन से जीतकर नया रिकार्ड बनाया! पासवान ने अपने जीवन में 11दफा लोकसभा का चुनाव लड़ा और वे 9 दफा विजयी रहे और दो दफा राज्यसभा के सदस्य रहे, अभी वर्तमान में भी राज्यसभा से सांसद थे। “राजनीतिक मौसम वैज्ञानिक ” के रुप में विख्यात हुये रामविलास बहुत दूरदृष्टी वाले नेता थे, यही कारण है कि सन् 1996 में जनता दल मोर्चा के प्रधानमंत्री इन्द्र कुमार गुजराल के समय से लेकर आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केबीनेट में लगातार ढाई दशक से केन्द्रीय मंत्री थे! सन् 2000 में अपनी खुद की लोकजनशक्ति पार्टी की गठन की घोषणा के बाद से पासवान अपने अंतिम समय तक केन्द्र की राजनीति में केन्द्र में एक बड़े नेता रुप बने रहे! उनके निधन से देश ने एक अनुभवी, सौम्य, नायाब और बेजोड़ जन नेता खो दिया जिसकी छत्तिपूर्ती कतई संभव नहीं है! उनके निधन से जहां देश और बिहार में शोक की लहर है तो उनके निर्वाचन क्षेत्र हाजीपुर जहां से उन्होने गिरते स्वास्थ्य के 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था, वहां मातम परसा हुआ है! ऐसे सच्चे जनसेवक को अश्रुपूर्ण श्रंद्धाजंली अर्पित!

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