Saturday, November 28, 2020

फिशिंग स्कैम में बी एस एन एल पर 30 करोड़ रू से ज्यादा और आइडिया वोडाफोन पर करीब 2 करोड, क्वड्रंट पर 1.5 करोड़ और एयरटेल पर 1.33 करोड़ रू का जुर्माना लगाया ट्राइ ने

सायबर क्रिमिनलों का साथ दे रहीं थीं चारों कंपनियां , फर्जी एस एम एस और नकली मैसेज को नहीं रोक पाईं चारों कंपनियां , पे टी एम तक के जाली मैसेज भेजते थे सायबर क्रिमिनल्स , मोबाइल नंबर के जरिये खाता हैक करातीं थीं कंपनियां , गायब हो जाते थे लोगों के आनलाइन ट्रांजेक्श्न बीच ही बीच में , रूपये गायब करातीं थीं ये कंपनियां
TRAI has imposed a penalty of INR 30.1 Cr on BSNL, as it failed to curb cybercriminals from issuing fake SMSes

A fine of INR 1.82 Cr has been imposed on Vodafone Idea, INR 1.41 Cr on Quadrant Teleservices and INR 1.33 Cr on Airtel

TRAI’s move comes even as Paytm is embroiled in a legal tussle with telcos, in an ongoing case in the Delhi HC
स्त्रोत : TRAI Fines Telcos INR 35 Cr For Failing To Clamp Down On Fake SMSes (
The Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) has imposed a penalty of INR 30.1 Cr on the state-run telecom company Bharat Sanchar Nigam Ltd, as it failed to curb cybercriminals from sending fake SMSes to dupe users of digital payments applications. BSNL had also failed to respond to TRAI’s show-cause notices and produce performance-monitoring reports.

Further, a fine of INR 1.82 Cr has been imposed on Vodafone Idea (Vi), INR 1.41 Cr on Quadrant Teleservices and INR 1.33 Cr on Airtel, as these telecom service providers (TSPs) had also failed to curb spam calls and text messages to their users.

In all, eight Indian telcos, which also include Reliance Jio, Mahanagar Telephone Nigam Ltd (MTNL), Videocon and Tata Teleservices, have been fined a collective amount of INR 35 Cr by TRAI.

TRAI’s move comes even as digital payments giant Paytm is embroiled in a legal tussle with the leading players of the Indian telecom industry, in an ongoing case in the Delhi High Court.

At a hearing in September, the court had asked TRAI to act against service providers violating regulations to curb spam calls and text messages.

Paytm’s contention was that telecom operators had been lax in monitoring the issuance of SMS headers — unique IDs through which commercial text messages are sent — to telemarketers. Hence, those wanting these SMS headers for fraud purposes had been able to get one, enabling them to send promotional SMSes to unsuspecting customers. A lot of these messages are disguised as coming from banks or payment executives, asking for the customer’s private details. Those who reply with their details, see their funds being siphoned off from their bank accounts or digital wallets.

According to the Economic Times, which first reported the development, TRAI’s penalties on telcos are on various counts of violation of the Telecom Commercial Communication Customer Preference Regulation (TCCCPR).

TRAI Says “No Information” About Number Of Fraud Telemarketers
Meanwhile, Inc42 had filed an RTI (right to information) request with TRAI, requesting the number of registered and unregistered telemarketers/senders of commercial text messages who’ve been penalised, off-boarded or blacklisted by TSPs, under the provisions of TCCCPR 2010, for the period for which TCCCPR 2010 and its amendments were in force.

The RTI had also requested TRAI to provide information about the complaints received regarding unsolicited commercial communication i.e. fake SMSes for fraud purposes, received from customers of TSPs from 2010-20.

In response to the RTI, TRAI said that there was no information available regarding the query.

In September, Inc42 reported that digital payments giants PhonePe, Mobikwik and Infibeam Avenues had backed Vijay Shekhar Sharma-led Paytm’s claims that telecom companies and the TRAI had been ineffective in handling the rising number of phishing cases in India.

In its original petition filed with the Delhi HC in July this year, Paytm had called out TRAI and telecom companies inaction in controlling phishing scams. It had also sought INR 100 Cr in compensation.

Paytm had explained that several scammers are registering themselves as telemarketers on these networks under headers similar to Paytm’s. Some examples are PYTM, PTM, IPAYTN, PYTKYC, BPaytm, FPaytm, PAYTMB, Ipaytm, mPaytm and other derivatives.

Once successful, these scammers send out malicious messages to Paytm customers, fooling them to reveal their personal and sensitive information including account details and passwords. Sometimes, these scammers also call customers to seek private information under the pretext of completing their know-your-customer (KYC) requirements to continue using their Paytm wallets.

However, the telecom giants Jio and Vi had, in turn, attacked Paytm for shifting the blame of its own lapses to evade legal liability of financial frauds and phishing scams that are occurring through its app. Jio had also highlighted that telecoms cannot be held liable for “unlawful activity” occurring over calls and messages under the Telecom Commercial Communication Customer Preference Regulation (TCCCPR), 2018.

It is worth noting that the eight telcos penalised by TRAI, could yet challenge the penalties in court.

सब्जियों और दालों के दाम आसमान पर , आलू 60 रू , प्याज 60 रू , भिंडी 40 रू , टमाटर 40 रू तो दालें 100 से 120 रू प्रतिकिलो , सरकार कुंभकर्णी नींद में

- नरेन्द्र सिंह तोमर ‘’आनन्द'’

( सुफल मटर सस्ती है बाजार में - छिली हुई ताजी मटर 40 रूपये की आधा किलो यानि 80 रू की एक किलो है )

मुरैना/ दतिया/ ग्वालियर/भिंंड / श्योपुर , सरकारें जनता को अच्छी खबर देतीं सुनातीं आईं हैं यह एक परंपरा है , और अच्छे दिन का सपना और वायदा वोट की कीमत में बेचतीं आईं हैं , यह एक रिवाज है ।

जब सोने के दाम में प्रति दस ग्राम ( बाजारू एक तोला दस ग्राम का और पुराना पारंपरिक देश में प्रचलित एक तोला 12 ग्राम का होता है , जब से होलोग्राम वाले आये हैं तब से दो तोला होलोग्राम खा जाता है और यह तोला दस ग्राम का रह जाता है ) के वजन में एक हजार या 500 रू की कमी हो तो मीडिया की सुर्खी बन कर खबर बन जाती है और फ्रंट पेज हेडलाइन होती है , सोने के दामों में जबरदस्त धमाकेदार कमी ,गोया आम आदमी या हर अखबार पढ़ने वाला केवल सोना खरीदने और सोने के दाम पता करने के लिये ही अखबार खरीदता और पढ़ता है ।

चंद प्रतिष्ठित मीडिया को अपवादस्वरूप अगर छोड़ दें तो बाकी बकाया मीडिया को यह पता ही नहीं कि हर अखबार खरीदने पढ़ने वाला साग सब्जी और रोटी तो जरूर ही खाता है ।

साग सब्जी रोटी हर आदमी जन्म से लेकर मरने तक संग संग ढोता खाता है , अपने संग बंधे चिपके और आश्रित परिवार वालों के पेट के लिये , जब वह जन्म के समय पेट साथ लेकर आता है और मरने तक इसी पेट को संग लिये घूमता है , तब तक कोई इसे मेहनत और ईमानदारी की ईंधन की खुराक डाल कर देह की गाड़ी चलाता है , भले ही उसकी स्पीड 500 मीटर प्रति घंटा हो या बेईमानी, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार ए दो नंबर , चार नंबर की औंधी सीधी कमाई का आलीशान मंहगा एयर पेट्रोल का ईंधन भर कर शताब्दी की स्पीड 140 किलो मीटर प्रतिघंटा या हवाई जहाज की स्पीड 600 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से इस नामुराद देह की गाड़ी चलाता या उड़ाता हो ।

बहरहाल ये साफ है कि जैसे हर स्कूटर मोटर सायकल वाले को पैदल चलता आदमी ओछा और छोटा तुच्छ गरीब इंसानी कीड़ा मकोड़ा नजर आता है तो हर कार वाले को स्कूटर मोटर सायकल वाले भी ऐसे ही नजर आते हैं , तो हर और बड़ी गाड़ीयों वालों जैसे बी एम डब्ल्यू, राल्स रायस या एम्पाला वालों को ये कारों वाले भी बड़े तुच्छ और ओछे छोटे कीड़े मकोड़े नजर आते हैं । क्या करिये इंसान की फितरत ही यही है , ग्वालियर के किले पर सास बहू यानि कि सहसबाहू के मंदिर से नीचे देखेंगे तो पूरा ग्वालियर ही , सब ई एम डब्ल्यू , बी एम डब्ल्यू , रेल गाड़ी अताब्दी शताब्दी , राजधानी वगैरह सब के सब ही रेंगते हुये छोटे मोटे तुच्छ और ओछे कीड़े मकोड़े नजर आने लगते हैं , यह फितरत नहीं , हकीकत है , दृष्टिकोण और दृष्टि युक्तिकरण है । और ऊपर लिखे बाकी सब इंसानी अहंकारी फितरत के दृष्टिभ्रम हैं ।

बिल्कुल कुछ ऐसा ही है , मीडिया भी एक दृष्टिभ्रम में रहता और चलता है , और जहां तक संभव हो यथार्थ व सचाई के धरातल से बचता है , वरना सच लिखने का कहने का ( नेता भी इसमें शामिल समझिये) अंजाम यह होगा कि जिनका सच कहा बोला लिखा जाये उनके पास तो फूटी छदाम नहीं है देने को और जो दे सकते हैं या जिनकी कृपा से या वरद हस्त से मीडिया चलता है या विज्ञापन वगैरह या बिना विज्ञापन दो नंबर में कुछ मिल मिलू जाता है वही लोग इस देश का असत्य हैं , गलत काम करने वाले , भ्रष्ट बेईमान और रिश्वतखोर हैं , अब उनकी कृपा ओर पैसे से से ही मीडिया चलना है । तो गरीब आम आदमी तब जाकर एक छपा अखबार या टी वी चैनल पर कुछ खबर पढ़ या देख पाता है । सो मीडिया भी साग सब्जी के दामों की आवाज उठाने के बजाय सोने के ही दाम बतायेगा जिसे आम गरीब आदमी देख सुन तो ले और अखबार या चैनल को बहुत बड़ा माने और समझे , चमक दमक दीखे भले ही सारे कपड़े उतार कर दीखे मगर चमचमाती चीज दीखे , चकाचौंध में आखें चौंधिया जायें तो और देखने पढ़ने वाला बाकी सब गम , परेशानियां और समस्यायें बिसरा दे और ध्यान भूल कर सोने के दामों को राष्ट्रीय चर्चा व महत्व का विषय समझे ।

अगर साग सब्जी जैसे मसले और चीजें टी वी चैनल पर या अखबारों में देखने पढ़ने को मिलेंगी तो चमक दमक का खेल खत्म हो जायेगा और ओछी व तुच्छ चीजें नेशनल लेवल पर दिखने लगेंगी और राष्ट्रीय चर्चा , महत्व और प्रोटेस्ट का आधार बन जायेंगी , दाम यकायक गिरकर बाबाज के लंगोट के माफिक कम और कम होते जाकर ऐसे धड़ाम से गिरेंगें जैसे लंगोट की पट्टी अचानक से खुल कर बिकनी की तरह फस्स् और सररर करती खिसक गई हो । गोया किसान से खरीदी कोई चीज पांच रूपया प्रति किलों केवल दह रूपये प्रतिकिलो के दाम पर आ जायेगी ।

मतलब ये कि जब बेचने वाला ही एक रूपये प्रतिकिलो के मुनाफे पर धंधा करेगा तो , बाकी दल्ले , नेता , अफसर , और लग्गा तग्गा मसलन मीडिया और …. वगैरह वगैरह कहां से पलेंगें , कहां से खायेंगें । उसी चीज को जब पचास रू प्रतिकिलो बेचा जायेगा तो बेचने वाले को भी पांच रू मुनाफे के और बाद बाकी , चुनाव टाइम पर नेताओं और पार्टीयों को चंदा , मंडी में दूकान या ठेला लगाने की रोजाना की नगरनिगम या नगरपालिका की रोजनदारी वसूली , पुलिस वाले बीट प्रभारी का लेन देन, और बीच बीच में बीट प्रभारी के बजाय फीती लगाये आ जाने वाले सिपहिया , जब तब पत्रकार और न जाने कितनों के हिसाब किताब के बाद अगर पांच रू प्रति किलो किसान से खरीदी चीज कोल्ड स्टोरेज में डाल कर बी एच सी यानि बैंजीन हैक्सा क्लोराइड और मैलाथियान तथा भैंस का इजेक्शन लगाकर लंबी मोटी कर बढ़ाई गईं सब्जियां जैसे लौकी , तोरई , कद्दू , बैंगन , खीरा और सेम आदि इन सबके खर्चों को निकाल कर अपने आप ही दाम उस पांच रू का पचास रू हो ही जाता है ।

मतलब साफ है ,कोल्ड स्टोरेज किसान को भी खा रहे और लूट रहे हैं तो जनता यानि आम आदमी को भी । एक बार मुरैना में हजारों टन आलू कोल्ड स्टोरेजों को बाहर सड़क पर यानि हाई वे पर फेंकना पड़ा था , ऐसा तब हुआ जब नया आलू किसान ले आया और वह कोल्उ स्टोरेज वाले आलू से पच्चीस गुना सस्ता था । लिहाजा कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेजों का मासिक किराया देना बंद कर दिया और नया माल ( आलू ) खरीद कर कोल्ड स्टोरेज ले जाना शुरू कर दिया ,बाजार में उस समय आम आदमी को कोल्ड स्टोरेज वाला आलू चालीस से पैंतीस रू प्रति किलो बेचा जा रहा था , मगर किसान का नया आलू मंडी में पांच रू प्रतिकिलो और मोहल्लों घरों में वह आठ रूपये और सात रू प्रतिकिलों के दाम पर हाथठेले वालों द्वारा बेचा जाने लगा तो , ऐसी सूरत में वही चालीस पैंतीस रू प्रतिकिलो वाला कीटनाशक दवायें मिला हुआ हजारों टन आलू सड़कों पर फेंकना पड़ा ।

उक्त घटनाक्रम से जाना जा सकता है कि सिस्टम में दोष कहां पर है , अलबत्ता कोल्ड स्टोरेजों की स्थापना इसलिये की गई थी कि किसान अपना माल यानि फसल उसमें रख सके और साल भर साग सब्जी आम जनता को हर मौसम में मिल सके , इसलिये नहीं कि दलाल , व्यापारी और विक्रेता , किसी किसान से सस्ते में माल खरीद कर सालभर मुनाफाखोरी , ब्लेकमार्केटिंग के लिये जमाखोरी कर सकें ।

किसी किसान ने अपना माल कोल्डस्टोरेज में रखा होता तो न कभी साग सब्जी के दाम बढ़ते और किसान आज तक इतना गरीब , परेशान और मजबूर व लाचार ही नहीं होता । सरकार अगर मंडी में फसल खरीदने और तुलाई के लिये किसानों का पंजीयन कर एस एम एस से नंबर लगवाती है कि केवल किसान ही बेच पाये अन्य कोई दलाल या व्यापारी नहीं ,तो फिर कोल्ड स्टोरेजों और बेयर हाउसों के लिये केवल किसान ही इनमें अपनी फसल की उपज रख सके , यह अनिवार्य क्यों नहीं करती , किसानों की भी समस्या हल होकर परेशानी खत्म हो जायेगी , किसानों के खाते की फसल की मेहनत की , लागत की मुनाफे की समस्या ही समाप्त हो जायेगी और आम जनता को भी पांच रू की चीज पचास रू प्रतिकिलो में लेने की फर्जी व कृत्रिम मंहगाई से हमेशा के लिये मुक्ति मिल जायेगी , किसान भी चैन से अपना परिवार पाल सकेगा और दो रोटी शान व इज्जत से खा सकेगा और आम आदमी भी जो आज केवल साग सब्जी के दाम पूछ कर मन मसोस कर लाचार होकर रह जाता है और देशी घी की तरह सब्जी वाले के ठेले के दर्शन कर पाव भर , या आधा किलो एकाध चीज कभी कभार खरीद कर रह जाता है और हर चुनाव के बाद हर सरकार से आस लगाता है कि अब दाम कम हो जायेंगें और हम चैन से ख पी सकेंगें ।

सरकारी साग रोटी खा रहे नेताओं और अफसरों को यह सारी बातें समझ नहीं जायेंगीं क्योंकि उनका समझदानी का लेवल हाई ( गोल्ड यानि सोने के लेवल ) रहता है और ये साग सब्जी , आम आदमी वगैरह जरा लो लेवल की बातें हैं , सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों के लेवल की बातें हैं ।

दूसरी भाषा में कहें तो ….. रोजाना खपत होने वाली चीजों को नकदी की यानि रोजाना मुनाफा देने वाली चीजें कहा जाता है , मसलन … माचिस , नमक , साग सब्जी , तेल , दाल , मसाले ( हर कोई नहीं डालता) आदि रोजाना बिकने , खपत होने वाली चीजें हैं और हर आदमी के इस्तेमाल की चीजें हैं , अगर यही आम आदमी से दूर हो गयीं और बेतहाशा बेलगाम मंहगीं इसी तरह ही रहीं और होतीं रहीं तो …… भई हम तो इसी तरह लिखते रहेंगें , और ग्वालियर टाइम्स इसी तरह प्रकाशित प्रसारित करती रहेगी ।

Friday, November 27, 2020

रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण कोरोना काल में कड़कनाथ की माँग बढ़ी शासन ने तैयार की कड़कनाथ पालन योजना

261120n13.jpg कोरोना काल में प्रदेश के प्रसिद्ध कड़कनाथ की देश में बढ़ती माँग को देखते हुए राज्य शासन ने इसके उत्पादन और विक्रय को बढ़ाने के लिये विशेष योजना तैयार की है। इससे कुक्कुट पालकों की आय में भी इजाफा होगा। कड़कनाथ का शरीर, पंख, पैर, खून, मांस सभी काले रंग का होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ कम वसा, प्रोटीन से भरपूर, हृदय-श्वास ओर एनीमिक रोगी के लिए लाभकारी है। कड़कनाथ पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अधिकृत विक्रेता चिकन पार्लर पर लोगों के लिये उपलब्ध है।

कड़कनाथ की विशेषताएँ



अन्य प्रजातियाँ

विकास का समय

90-100 दिन

40-45 दिन


1250 ग्राम/ 90-100 दिन

2 कि.ग्रा./40-45 दिन

क्रूड प्रोटीन




2400-2500 कैलोरी

3250-2800 कैलोरी


0.73 से 1.03 %

13 से 25 %


184.75 मि.ग्रा./100 ग्राम

218.12 मि.ग्रा.

लिनोलिक एसिड

24 %

21 %


कम संक्रामक

अधिक संक्रामक बेक्टीरियल एवं वॉयरल बीमारियाँ

पालन से लाभ

ब्राण्डेड वेल्यू तथा नियमित आय के साथ अधिक दर पर विक्रय

सामान्य वेल्यू तथा कम दरों पर विक्रय

अपर मुख्य सचिव पशुपालन श्री जे. एन. कंसोटिया ने बताया कि कड़कनाथ कुक्कुट पालन को सहकारिता के माध्यम से बढ़ावा देने के लिये कड़कनाथ के मूल जिलों- झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी और धार जिलों की पंजीकृत कड़कनाथ कुक्कुट पालन समितियों के अनुसूचित जनजाति के 300 सदस्यों को एन.एल.आर.एम. में प्रशिक्षण भी दिया गया है। झाबुआ जिले का चयन कड़कनाथ की मूल प्रजाति के लिये प्राप्त जी.आई. टेग के कारण किया गया है। योजना में 33 प्रतिशत महिलाओं को स्थान दिया गया है।

हितग्राहियों को मिलेंगे 28 दिन के चूजे नि:शुल्क

प्रत्येक चयनित हितग्राही को नि:शुल्क 28 दिन के वैक्सीनेटेड 100 चूजे, दवा, दाना-पानी का बरतन और प्रशिक्षण देने के साथ ही उनके निवास पर शेड भी बनाकर दिया जायेगा। राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम पालन-पोषण, प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग, दवा प्रदाय और मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

ई-नगरपालिका पोर्टल की समीक्षा के लिये समिति गठित

प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री नीतेश व्यास द्वारा नगर निगम एवं नगर पालिका परिषदों/नगर परिषदों में संचालित ई-नगरपालिका पोर्टल की समीक्षा के लिये समिति गठित की गयी है।

समिति में डॉ. सुषमा दुबे वित्तीय सलाहकार नगरीय विकास एवं आवास अध्यक्ष होंगी। समिति में श्री सौरभ तिवारी लेखाधिकारी नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, श्री अली मोहम्मद कनिष्ठ लेखाधिकारी वित्तीय सलाकार नगरीय विकास एवं आवास और श्री देवेन्द्र व्यास सहायक संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय सदस्य होंगे। श्री योगेन्द्र पटेल सहायक संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय सदस्य सचिव होंगे।

1.50 रु. के स्थान पर 50 पैसे होगा मंडी शुल्क 14 नवंबर 2020 से आगामी 3 माह के लिए लागू होगी यह छूट

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में व्यापारियों से लिए जाने वाले मंडी शुल्क की राशि अब 1.50 रु. के स्थान पर 50 पैसे प्रति 100 रु. होगी। यह छूट 14 नवंबर 2020 से आगामी 3 माह के लिए रहेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने गत दिनों व्यापारियों से इस संबंध में किए गए वादे को पूरा कर दिया है। व्यापारियों द्वारा मुख्यमंत्री श्री चौहान को आश्वस्त किया गया था कि इससे मंडियों की आय में कमी नहीं होगी। 3 महीने बाद इस छूट के परिणामों का अध्ययन कर आगे के लिए निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज इस संबंध में विभाग की उच्च स्तरीय बैठक ले रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव श्री अजीत केसरी, प्रमुख सचिव श्री मनोज गोविल तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

गत वर्ष मंडियों को हुई थी 12 सौ करोड़ रुपए की आय

वर्ष 2019-20 में प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों को मंडी फीस एवं अन्य स्रोतों से कुल 12 सौ करोड रुपए की आय हुई थी। मंडी बोर्ड में लगभग 4200 तथा मंडी समिति सेवा में लगभग 29 सौ अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं तथा लगभग 2970 सेवानिवृत्त अधिकारी- कर्मचारी हैं। इनके वेतन भत्तों पर गत वर्ष 677 करोड रुपए का व्यय हुआ था।

आगे भी लागू रह सकती है छूट

व्यापारियों के आश्वासन पर मंडी शुल्क में छूट दी गई है। छूट की अवधि में यदि मंडियों को प्राप्त आय से मंडियों के संचालन, उनके रखरखाव एवं कर्मचारियों के वेतन भत्तों की व्यवस्था सुनिश्चित करने में कठिनाई नहीं होती है, तो राज्य शासन द्वारा इस छूट को आगे भी जारी रखा जा सकता है।

पट्टे पर ली गयी पर्यटन के लिये सरकारी जमीन पर अब म प्र में लिया जा सकेगा बैंक से लोन

वर्ष 2017 के बाद मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या हुई डेढ़ गुनी
भारत के पर्यटन नक्शे पर मध्य प्रदेश सातवें स्थान पर
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ली पर्यटन कैबिनेट की बैठक
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश में पर्यटन का तेज गति से विकास कर न सिर्फ इसे भारत में पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है, बल्कि इसके माध्यम से रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित करने हैं। प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है तथा प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग डेढ़ गुना हो गई है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज मंत्रालय में पर्यटन कैबिनेट की बैठक ली। बैठक में पर्यटन के लिए मध्यप्रदेश में लीज पर दी जाने वाली शासकीय भूमि पर बैंकों से ऋण लेने की पात्रता संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला आदि उपस्थित थे।

प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि पर्यटन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश का भारत में सातवां स्थान है। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश में कुल 5 करोड़ 88 लाख पर्यटक आए वहीं वर्ष 2019 में आठ करोड़ 90 लाख से अधिक पर्यटक मध्यप्रदेश में आए।

प्रदेश में चल रही है पांच फिल्मों की शूटिंग

मध्यप्रदेश की फिल्म पर्यटन नीति, जिसके तहत प्रदेश में फिल्म, टीवी सीरियल, वेब सीरीज आदि निर्माण के लिए ₹10 करोड़ तक का अनुदान दिया जाता है, काफी लोकप्रिय हो रही है। वर्तमान में प्रदेश में पांच फिल्मों की शूटिंग चल रही है। राजकुमार संतोषी, अनुपम खेर जैसे फिल्म निर्माता मध्यप्रदेश में फिल्म शूट कर रहे हैं। वर्ष 2020 21 में लगभग 45 फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी सीरियल आदि की शूटिंग संभावित है।

साहसिक एवं जल कीड़ा पर्यटन

मध्यप्रदेश की कैंपिंग नीति 2018 तथा जल पर्यटन नीति 2017 के चलते यहां साहसिक एवं जल क्रीड़ा पर्यटन में काफी वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत प्रदेश में सभी सावधानियां बरतें हुए सीमित संख्या में ये गतिविधियां की जा सकती हैं।

रिस्पांसिबल टूरिज्म मिशन

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में रिस्पांसिबल टूरिज्म मिशन चालू किया गया है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन, अनुभव आधारित पर्यटन, हस्तकला एवं हस्तशिल्प पर्यटन, स्वस्थ जीवन शैली पर्यटन आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के ‘वर्चुअल टूर’ विदेशों में लोकप्रिय

प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि मध्य प्रदेश के 20 वर्चुअल टूर तैयार किए गए हैं, जो कि गूगल आर्ट एंड कल्चर के माध्यम से विदेशों में अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में फिल्म एंड प्री वेडिंग शूटिंग तथा डेस्टिनेशन टूरिज्म पॉलिसी भी बनाई गई है।

धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। देश में बुद्धिस्ट सर्किट, रामायण सर्किट, तीर्थंकर सर्किट आदि विकसित किए जा रहे हैं। ओमकारेश्वर कथा अमरकंटक का विकास किया जा रहा है। सालरिया गो अभयारण्य जैसे स्थानों पर ध्यान एवं आयुष चिकित्सा के अंतर्गत पंचकर्म आदि पर केंद्रित पर्यटन केंद्र प्रारंभ किए जा सकते हैं।

वन एवं पर्यावरण आधारित पर्यटन

मध्यप्रदेश में वन एवं पर्यावरण आधारित पर्यटन के अंतर्गत वाइल्डलाइफ सर्किट, इको सर्किट, बफर में सफर आदि पर कार्य किया जा रहा है। लोनली प्लैनेट संस्था द्वारा मध्य प्रदेश को दुनिया का तीसरा सबसे अच्छा गंतव्य चुना गया है।

बंद होंगें बरसों पुराने ग्वालियर, इंदौर रीवा के ऐतिहासिक शासकीय मुद्रणालय , पशुपालन विभाग का नाम बदलेगा

मंत्रि-परिषद ने पशुपालन विभाग का नाम परिवर्तित कर पशुपालन एवं डेयरी विभाग किये जाने एवं कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन की कार्यवाही करने का भी निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने हॉक फोर्स में सहायक सेनानी के 5 पदों को समर्पित कर 3 उप सेनानी के पदों के निर्माण की स्वीकृति दी है।

मंत्रि-परिषद ने शासकीय मुद्रणालय ग्वालियर, इंदौर, रीवा को बंद करने एवं शासकीय प्रेस के 495 पदों को समर्पित एवं 185 पदों को सांख्येत्तर घोषित करने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश प्रतीकरात्मक वन-रोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (राज्य कैम्पा प्राधिकरण) के कार्यालय की स्थापना तथा उसके लिये पदों की मंजूरी दी।

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