Monday, November 9, 2020

मंगल के दंगल ( मतदान) का फैसला भी मंगल को , कांग्रेस के मंथन का काल भी कल से शुरू

फिल्म रोटी , राजेश खन्ना की , इन उचपुनावों पर ठीक ही बैठती है , इस फिल्म के दो सबसे बेहतर संवाद हैं और बहुत लोकप्रिय भी - 1. मंगल सिंह मंगल को पैदा हुआ और मंगल को ही मरेगा 2. दूसरा है - फिर मिलेंगें

दोनों ही संवाद इन विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में तकरीबन ठीक फिट बैठते हैं - मंगल सिंह ( तीन साल के विधायकों ) के लिये मतदान 3 तारीख को यानि मंगल को हुआ , और इनके मतदान का परिणाम भी 10 तारीख यानि मंगल को ही आयेगा । जो निबटेंगें वे कहेंगें - फिर मिलेंगें - जो जीतेंगें वे कहेंगें कि मंगल सिंह मंगल को पैदा हुआ और …..

खैर जो भी हो कल पता चल जायेगा , जिसकी सरकार बननी है या बचनी है , उसका फैसला भी दोपहर 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हो जायेगा , उसके बाद तो सब औपचारिकता मात्र रह जायेगी , पहले स्पष्ट बहुमत के रूझाान करीब 11 बजे तक मिलने लगेंगें तो वहीं यह भी तय हो जायेगा कि सन 2023 के विधानसभा चुनावों में क्या होगा और किसकी सरकार फिर अगले 15 - 20 साल मध्यप्रदेश में रहनी है ।

हांलांकि दो बातें एकदम साफ और स्पष्ट हैं पहली ये कि मध्यप्रदेश में अभी तो वही सरकार रहनी है जो वर्तमान में है और उनके लिये केवल 8 सीट मात्र निकालना बहुत ही आसान और पक्का काम है । इसलिये फिलहाल कांग्रेस को तो फील्डिंग ही करनी है और यही हालात रहे तो सन 2023 के चुनाव के बाद 15 / 20 साल भी आगे भी फील्डिंग की तैयारी रखे ।

कल के परिणाम आने के बाद भी अगर कांग्रेस और कांगेसी नहीं समझे तो , साक्षात परमात्मा और विरंचि बृह्मा भी नहीं इन्हें समझा सकते ।

विचार करने को पूरे तीन साल कांग्रेस को और कांग्रेसियों को मिलेंगें , और यह मंथन करना चाहिये कि 15 महीने में कहां कहां चूके , कहां कहां क्या क्या गलतियां कीं , और उनका मार्जन और परिमार्जन क्या है ।

हर गली मंजिल की ओर जाये , यह जरूरी नहीं होता , राह चलते चलते कभी पता चलता है कि पूरी गली पार करने के बाद , पता चला कि आगे गली बंद है ।

खैर इतने पर ही सतोष मुनासिब होगा कि नये तीन साला विधायक केवल तनखा ले पायेंगें , इन्हें पेंशन नहीं मिलेगी , उसके लिये पूरे पांच साल विधायक रहना जरूरी है ।

खैर इतना साफ है कि अगले तीन साल वर्तमान सरकार सही सही और कायदे के फायदे के काम करेगी , अपनी इमेज बनायेगी और अपने काम के दम पर वोट मांगेंगी । इसलिये अब यहां से आगे कांग्रेस की डगर और राह मुश्किल ही मुश्किल है । अवसरवादी कांग्रेसी चोट खायेंगें , यह मुकम्मल पुख्ता है, बहुत से उपेक्षित और पुख्ता कांग्रेसी जल्द ही नई वर्तमान सरकार के किसी न किसी रूप में हिस्सा होंगें । और सन 2023 में कांग्रेस की बुनियादें यानि ग्रासरूट और पिलर्स यानि स्तंभ पूरी तरह से खत्म हो चुके होंगें ।

कांग्रेस के हाईकमान लेवल ने इस पूरे चुनाव से खुद को दूर रखा है और सोनिया गांधी , राहुल गांधी , प्रियंका गांधी ने प्रत्याशीयों की नहली सूची जारी होने के बाद से म प्र चुनावों से खुद को पूरी तरह से दूर भी कर लिया और म प्र चुनावों में स्टार प्रचारक सूची में नाम होने और दौरा कार्यक्रम घोषित कर देने क बावजूद म प्र में कदम नहीं रखा और न सोशल मीडिया वगैरह या अन्य किसी प्रकार से कोई शिरकत ही की । इससे उनका स्पष्ट संदेश म प्र कांग्रेस को समझ लेना चाहिये । अब भी नहीं समझे तो , समय रहते समझ में आ जायेगा ।

कांग्रस हाई कमान की यह चतुराई ही रही वरना वही बात हो जाती …. वे जहां प्रचार करने जाते या गये वहीं वहीं कांग्रेेस …. खैर …… कांग्रेस में दिल्ली स्तर और हाई कमान स्तर पर संगठन में मध्यप्रदेश में बहुत बड़े फेरबदल की रूपरेखा खींची जा रही है ….. हमारी शुभकामनायें सभी प्रत्याशीयों को ……

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